Wednesday, June 29, 2022
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एबीवीपी बिहार के आह्वाहन पर कार्यकर्ताओं ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) के रद्द किए जाने के खिलाफ पूरे राज्य में काला दिवस मनाया |

एबीवीपी बिहार के आह्वाहन पर कार्यकर्ताओं ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) के रद्द किए जाने के खिलाफ पूरे राज्य में काला दिवस मनाया |

एबीवीपी बिहार के आह्वाहन पर कार्यकर्ताओं ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) के रद्द किए जाने के खिलाफ पूरे राज्य में काला दिवस मनाते हुए सोशल मीडिया पर #रोलबैकएसटीईटी हैशटैग के साथ ऑनलाइन आंदोलन चलाया गया जिसमें हजारों छात्रों ने भाग लिया और ये हैशटैग घंटो तक नंबर वन पर ट्रेंड करता रहा।

जिसमें मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री व बिहार बोर्ड के अध्यक्ष से पुनर्विचार करने की मांग की गई।इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए अभाविप बिरौल के कार्यकर्ताओं ने छात्रों एवं शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।

विद्यार्थी परिषद् के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य केशव आचार्य ने कहा कि सरकार ने इस वर्ष हुई परीक्षा को अचानक रद्द कर दिया जिसमें 2 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी सम्मिलित हुए थे।उधर बोर्ड ने परीक्षा के फिर से आयोजन का प्रस्ताव भेजा है जो छात्रों के भविष्य के साथ ना सिर्फ खिलवाड़ है बल्कि एक मानसिक प्रताड़ना भी है।

नवीन आनंद ने बताया कि एसटीईटी की परीक्षा कब होगी इस बारे में बोर्ड द्वारा कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है जिसका प्रभाव सरकार द्वारा घोषित 34 हजार शिक्षकों की बहाली पर भी पड़ेगी।

जबकि पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सोहन कुमार ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था भ्रष्ट तंत्र के सामने नतमस्तक हो गई है जिसका परिणाम है कि लाखो युवाओं के भविष्य की परवाह किए बिना परीक्षा रद्द करने का आत्मघाती निर्णय लिया गया है।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निरज चौधरी ने कहा 16 मई को अचानक 4 सदस्यीय कमेटी ने परीक्षा रद्द करने की बात कही है जबकि परीक्षा के बाद बोर्ड अध्यक्ष ने साफ किया था कि परीक्षा भ्रष्टाचारमुक्त एवं कहीं पर भी पर्चा लीक नहीं हुआ है तो फिर ऐसे में क्या मजबूरी है कि अपरिहार्य कारणों से परीक्षा को रद्द करना पड़ा।

पूर्व महासचिव अभिरंजन झा ने कहा कि जब मामले में हाई कोर्ट का फैसला 22 मई को आने वाला था तो इससे पहले परीक्षा को रद्द किया जाना कितना उचित है।वहीं नगर सह मंत्री मिश्रीलाल ने सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।

वहीं पप्पू सहनी ने कहा कि बिना शिक्षक के नए विद्यालयों की घोषणा सरकार के नियत पर सवाल खड़े करती है।एबीवीपी बिरौल के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता है तो एबीवीपी कार्यकर्ता पूरे बिहार में आने वाले समय में आंदोलन को बाध्य होंगे।

ऑनलाइन आंदोलन में अभाविप के मनीष आचार्य, मनमोहन चौधरी,अवधेश चौधरी,रितिक सिंह,काजल कुमारी,विकास मंडल,सुजीत साहू आदि ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

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