Wednesday, May 25, 2022
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जातिवाद एक अभिशाप।।

जातिवाद एक अभिशाप।।

वीरभद्र की कलम से:-भारत का इतिहास गवाह है कि हम जब जब गुलाम हुए तो आपसी फूट की वजह से।आजादी के इतने वर्षों बाद भी जब दुनियाँ चांद-तारों पर पहोंच रही है हमारा समाज अब भी उसी गुलामी भरी मानसिकता से ग्रसित हो पुराने खयालातों में जीना चाहता है।हिंदुओ में एकता हो भी कैसे सकती है इसकी नियति शायद गुलामों वाली है।

हम हिन्दू होकर भी ना जाने कितने खंडों में बटे हुए हैं यहाँ तक कि सवर्ण के भी यहाँ प्रकार होने लगे आप ब्राह्मण हैं तो एक अलग प्रकार के ब्राह्मण से भेदभाव करेंगे।आखिर कितने खंडों में बटेंगे हम।ये मानसिकता हमे कहां तक लेकर जाएगी।देश को आजाद हुए करीब पचहत्तर साल होने को हैं पर समाज आज भी गुलाम है।एक ब्राह्मण लड़की दूसरे प्रकार के ब्राह्मण लड़के से शादी नही कर सकती।बिरादरी में हंशी हो जाएगी कैसी गुलामी भरी मानसिकता है ये और कैसी आजादी।किसी बालिग लड़की को उसके जीवनसाथी चुनने की आजादी नही अपने जीवनसाथी के साथ जीवन लड़की को बिताना होता है ना कि परिवार के दूसरे सदस्यों को फिर लड़की को उसके जीवनसाथी चुनने की आजादी क्यों नही।

क्यों परिवार के लोगों द्वारा ऐसे सम्बन्धों में लड़की पर दबाव देकर उसे गुलाम बनने के लिए प्रेरित किया जाता कि जो हम कहें वही होगा।लड़की के खुद की कोई आजादी नहीं उसकी कोई स्वतंत्रता नही।उसके अपने प्रेमी के चुनाव को पारिवारिक प्रेम के खिलाफ जोड़कर देखा जाता है।कोई लड़की किसी लड़के से प्रेम कर ले तो इसका मतलब वो परिवार से प्रेम नही करती है ये कैसा जजमेंट है।लड़की परिवार से भी प्रेम करती है और अपने प्रेमी से भी बस दोनों के जगह अलग-अलग हैं।लड़की अपने परिवार के लिए अपने कर्तव्यों को लेकर जिम्मेवार है ना कि अपने जिंदगी के अहम फैसलों को लेकर।जिंदगी उसका है तो फैसले उसके होंगे स्वतंत्रता तब है।

आज अमेरिका आगें है तो वहां ऐसी स्वतंत्रता आम है।वहां लड़कियां स्कर्ट पहन कर चलती हैं तो लड़के गलत दृष्टि से उन्हें निहारने नही लगते।वहां सब स्वतंत्र हैं अपने तरीके के कपड़े पहनने के लिए अपने तरीके की जिंदगी जीने के लिए।सब अपने-अपने काम मे व्यस्त हैं अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं दूसरों की जिंदगी में ताका-झांकी करने की जरूरत उन्हें नही मेहसूस होती।इन्हीं कारणों से हमारा देश आज भी अमेरिका से कई वर्ष पीछे चल रहा है।जबतक हम अपनी सोच नही बदलेंगे समाज यूँ हीं आपस मे लड़-झगड़ कर मरता रहेगा और हम यूँ हीं हमेशा विकास से कोषों दूर रहेंगे।।

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